भूले आसमान के नीचे, भूली हुई ज़मीनों में,

एक योद्धा पड़ा है, समय के साथ झुका हुआ,

कभी एक सेनापति, गौरव में लिपटा हुआ,

अब एक छाया, जंजीरों में जकड़ा हुआ कीचड़ में।

वह हवा में बैनर के नीचे, सैन्य रैंक का सुनहरा विशिष्ट बैज या प्रतीक लेकर चलता था,

अपने गौरवपूर्ण क्षण में, हज़ारों लोग उसके पीछे चलते थे।

लेकिन अभिमान एक ब्लेड था, उसके दिल में एक पीड़ा,

जिसने इतिहास के सबसे काले हिस्से को चिह्नित किया।

उसका अभिमान, व्यापक जहर की तरह,

उसने दिमाग को जहर दिया है, एक भविष्य को खारिज कर दिया है।

और अधिक की लालसा में, वह खुद को भ्रमित पाता है,

एक खोई हुई सेना, एक भंवर में निगल गई।

अब वह फुटपाथ पर, परित्यक्त पड़ा है,

बूढ़ा, थका हुआ, और अभी भी अदम्य।

उसकी आवाज़, जो कभी आदेश का सम्मान करती थी,

अब हवा में एक चीख, खोई हुई और शापित।

अब कोई प्यार नहीं करता, कोई उसका पीछा नहीं करता, बस छोड़ दिया है,

उसका बिस्तर, सड़क, उसका लबादा, चिथड़ा।

फिर भी, उसकी आँखों में, एक आग जो कभी शांत नहीं हुई,

एक टूटे हुए राज्य का अहंकार और गुस्सा।

रात गिरती है, ठंडी गवाह,

बेघर आदमी की, भूले हुए।

लेकिन गुमनामी में भी, अपने जेल में,

गर्व बना रहता है, एक आत्मा जो कभी झुकती नहीं।

इस तरह पतन और दर्द की कहानी समाप्त होती है,

एक नायक की जो भिखारी बन गया,

जिसका जीवन एक चेतावनी है, उन लोगों के लिए जो सम्मान चाहते हैं,

कि विनम्रता ताकत है, चमकदार सोने से भी ज्यादा।