मानव पुनर्जागरण का घोषणापत्र
चेतना की एक नई सुबह की ओर,
जहाँ मनुष्य फिर से याद करे कि वह कौन है,
मशीनों से पहले,
एल्गोरिदम से पहले,
डर से पहले,
कर्ज से पहले।
सृजक पिता की ओर।
जीवन के स्रोत की ओर।
भविष्य की ओर।
क्योंकि आने वाले समय को अपनी मानवता खोए बिना पार करने के लिए यही आवश्यक शर्त है।
पिता कोई धार्मिक विश्वास नहीं हैं।
वह पुन: प्राप्त केंद्र हैं।
अस्तित्व का लंगर (ऑन्कोलॉजिकल एंकर)।
सत्य का स्रोत।
मनुष्य की मूल स्मृति।
और केवल उनके पास लौटकर ही मनुष्य सामना कर पाएगा
स्वतंत्रता और बुद्धिमत्ता के साथ भविष्य की असाधारण चुनौतियों का,
अपने से बड़े तंत्रों का कैदी बने बिना।
इसलिए वैश्विक सुरक्षा का सर्वोच्च रूप केवल बुनियादी ढांचे के नियंत्रण से पैदा नहीं होगा।
यह मनुष्य के आंतरिक पुनर्जन्म से पैदा होगा।
क्योंकि जब भी मनुष्य पिता को पाता है, वह स्वयं को पाता है।
और जब भी वह स्वयं को पाता है, दुनिया के लिए एक नई संभावना खुलती है।
जो सुबह हमारा इंतजार कर रही है वह मशीन की नहीं है।
वह जागृत मनुष्य की है।
