पृथ्वी की नई मुद्रा
एक ऐसा समय आएगा जब मनुष्य यह जान पाएगा कि जिसे उसने संपत्ति समझा था, वह केवल सच्चे खजाने की एक परछाईं मात्र थी।
सिक्कों के चेहरे बदल जाएंगे। बाज़ारों की भाषा बदल जाएगी। साम्राज्यों के पैमाने बदल जाएंगे।
और जिसे सदियों से शक्ति माना जाता रहा था, वह अचानक हवा में धूल की तरह कमज़ोर दिखाई देने लगेगा।More
