शुरुआत में, यह केवल एक कंपन था। एक प्राचीन मठ की खामोशी में एक पन्ना हिला। वहाँ कोई हवा नहीं थी। दुनिया के दूसरी ओर, एक भूले-बिसरे मंदिर की धूल के नीचे, एक और किताब खुली। फिर दूसरी। और फिर एक और। हजारों वर्षों से सुरक्षित रखे गए स्क्रॉल (पांडुलिपियाँ)। समय से काली पड़ी तख्तियाँ। उन लोगों को सौंपी गई बातें (शब्द) जिन्होंने कभी एक-दूसरे के नाम तक नहीं जाने थे। कोई चीज़ उन्हें पुकार रही थी। स्याही काँपने लगी। अंधेरे में प्राचीन संकेत जाग उठे। एक शब्द। फिर दूसरा। फिर सौ। मानो तारे अचानक उस नक्षत्र को याद कर रहे हों जिससे वे संबंधित हैं। टुकड़ों ने एक-दूसरे को पहचान लिया। समय झुक गया। हजारों वर्षों से मृत भविष्यवक्ता एक ही ‘घड़ी’ की ओर मुड़ते हुए प्रतीत हुए। और फिर ऐसा हुआ। शब्द पन्नों से उठ खड़े हुए। उन्होंने रेगिस्तान पार किए। समुद्र। खंडहर। सदियाँ। वे सोती हुई पृथ्वी पर अदृश्य दौड़ पड़े और एक ही बिंदु पर आकर मिल गए। वहाँ, रात के दिल में, एक आदमी चल रहा था। कोई मुकुट नहीं। कोई सेना नहीं। सत्ता का कोई प्रतीक नहीं। केवल एक आदमी। और जैसे-जैसे वह चला, प्राचीन शब्द उसकी ओर आए। एक के बाद एक। मानो वे उसे जानते हों। मानो वे उसी की प्रतीक्षा कर रहे हों। वे उसके घावों में उतर गए। उसकी साँस में। उसके खून में। उसकी स्मृति में। जब तक कि यह बताना असंभव नहीं हो गया कि भविष्यवाणी कहाँ समाप्त हुई और वह आदमी कहाँ से शुरू हुआ। किताब देह बन चुकी थी। स्वर्ग स्थिर हो गया। फिर, उस आदमी के माध्यम से, आवाज़ गुजरी। तेज़ नहीं। हिंसक नहीं। और फिर भी ब्रह्मांड में कुछ काँप उठा। पिता की आवृत्ति (Frequency)। पहले पल जितनी प्राचीन। रात के अस्तित्व में आने से पहले के प्रकाश जितनी शुद्ध। इसने शहरों और राष्ट्रों को पार किया। यह भाषाओं, सीमाओं, मंदिरों से परे निकल गई। और उस एकमात्र स्थान तक पहुँची जिसे कोई भी झूठ कभी मिटा नहीं पाया था: मानव हृदय के भीतर ‘मूल’ (Origin) की स्मृति। एक अजनबी रुक गया। फिर दूसरा। एक स्त्री ने अपनी आँखें उठाईं। एक बूढ़ा आदमी बिना जाने क्यों रो पड़ा। उनके भीतर की किसी चीज़ ने पहचान लिया था। दिमाग से पहले। शब्दों से पहले। नाम से पहले। मुझे याद है। और उसी पल, पृथ्वी के सबसे दूर कोने में, प्राचीन पुस्तकें अंततः शांत होती हुई प्रतीत हुईं। उन्होंने अपना रहस्य बहुत लंबे समय तक सुरक्षित रखा था। वे भविष्य की भविष्यवाणी करने के लिए नहीं लिखी गई थीं। उन्हें सदियों के बीच इसलिए छोड़ा गया था ताकि, जब भविष्य अंततः देह बन जाए, तो मानवता उसे पहचान सके। आदमी चलता रहा। उसके पीछे, रात। आगे, क्षितिज पर प्रकाश की एक उस्तरे जैसी पतली रेखा प्रकट हुई। किसी ने उसका नाम नहीं लिया। अभी नहीं। क्योंकि कहीं, समय से परे, भविष्यवक्ता पहले ही मुस्कुराने लगे थे। और पिता ने, सन्नाटे में, अपनी आँखें खोल ली थीं। भविष्यवाणी इतिहास में कदम रख रही थी।
