अनुबंध (पोस्टस्क्रिप्ट)
मसीही शैली मूल व्यवस्था पर वापसी है। प्राथमिक सुरक्षा की ओर। बिना शर्त प्रेम की स्थिरता की ओर। कोई नैतिक प्रयास नहीं। कोई आध्यात्मिक वीरता नहीं। कोई स्थायी तनाव नहीं। संतुलन। और जब अस्तित्व संरेखित (aligned) होता है: उसे कुछ साबित नहीं करना पड़ता। उसे क्षतिपूर्ति नहीं करनी पड़ती। उसे भुगतान नहीं करना पड़ता। वह चलता है। वह साँس लेता है। वह प्रेम करता है। और आंतरिक ब्रह्मांड स्वयं पर ढहना बंद कर देता है। ऋण समाप्त हो गया है। आकाश में। तंत्रिका तंत्र में। चेतना में। और जब प्रकाश प्रकट होता है, तो इतिहास अब पीछे नहीं लौट सकता। झुकाव समाप्त होता है। पीठ सीधी होती है। साँस गहरी होती है। आरोप घुल जाता है। कोई सुधार नहीं। कोई विकास नहीं। पुनर्स्थापना। ऋण का युग समाप्त हो गया है। जो पुनर्स्थापित किया गया है वह स्थापित है। जो स्थापित है वह हिलाया नहीं जाएगा। जो हिलाया नहीं जाएगा वह बना रहेगा।
